ग्राम बेरडी में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में उमड़ा जनसैलाब, 300 से अधिक मरीजों ने कराई जांच स्व. दिलीप गुर्वे की स्मृति में U 4 H Foundation की पहल, शॉर्टेक हॉस्पिटल नागपुर के चिकित्सकों ने दी स्वास्थ्य सेवाएं, मरीजों को निःशुल्क दवाइयां भी वितरित बेरडी/सौंसर। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और जरूरतमंद लोगों को उपचार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ग्राम बेरडी में पूर्व सरपंच एवं सरपंच संगठन सौंसर के अध्यक्ष रहे स्वर्गीय दिलीप गुर्वे की स्मृति में भव्य निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। U 4 H Foundation द्वारा आयोजित इस शिविर में नागपुर के शॉर्टेक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। शिविर में क्षेत्र के ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। 300 से अधिक मरीजों ने स्वास्थ्य जांच कराई। चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक परामर्श दिया। जांच के बाद मरीजों को निःशुल्क दवाइयां भी वितरित की गईं, जिससे जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। सेवा और संवेदना को समर्पित पहल स्वर्गीय दिलीप गुर्वे की स्मृति में आयोजित यह स्वास्थ्य शिविर समाजसेवा और जनकल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परामर्श की उपलब्धता कई लोगों के लिए राहत का माध्यम बनती है। ऐसे शिविर लोगों को अपनी सेहत के प्रति सजग रहने और बीमारियों की समय रहते पहचान कराने के लिए भी प्रेरित करते हैं। 300 से अधिक मरीजों को मिला लाभ शिविर में बड़ी संख्या में मरीजों की उपस्थिति ने ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया। स्वास्थ्य जांच के साथ दवाइयों का निःशुल्क वितरण इस आयोजन की प्रमुख विशेषता रहा। इस पहल से स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के साथ जरूरतमंद लोगों तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया गया। आयोजक टीम और चिकित्सकों का जताया आभार इस आयोजन के सफल संचालन के लिए U 4 H Foundation की पूरी टीम तथा शॉर्टेक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, नागपुर के समस्त चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उनके सहयोग और सेवाभाव से शिविर में पहुंचे मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकीं। संदेश स्पष्ट है—स्वस्थ समाज ही सशक्त समाज की नींव है। ग्राम बेरडी में आयोजित यह निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर जनसेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवता की भावना का प्रेरणादायक उदाहरण बना।

ग्राम उटेकाटा में प्रस्फुटन शक्ति संचय कार्यक्रम सम्पन्न, समितियों को दिया गया प्रशिक्षण दस्तावेजीकरण, संवाद कौशल और ग्रामीण विकास में जनभागीदारी बढ़ाने पर दिया जोर पांढुर्णा, 24 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के अंतर्गत ग्राम उटेकाटा में सेक्टर क्रमांक-3 की ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के लिए एक दिवसीय सेक्टर स्तरीय प्रस्फुटन शक्ति संचय कार्यक्रम आयोजित किया गया। नवांकुर संस्था जनजातीय पिछड़े कल्याण संकल्प संस्थान, देवी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में समितियों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को क्षमता संवर्धन, संवाद कौशल और दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण दिया गया। जिला समन्वयक श्री अखिलेश जैन के निर्देशानुसार आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री रघुनाथ माडवी का स्वागत किया गया। श्री राजेंद्र भक्ते ने मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उद्देश्यों एवं कार्यों की जानकारी देते हुए ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों की सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका बताई। जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति किया जागरूक प्रशिक्षण के दौरान परामर्शदाता श्री सुभाष ठाकरे ने जल संरक्षण, नशामुक्ति, वृक्षारोपण, स्वच्छता तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने और विकास कार्यों में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। रजिस्टर संधारण और पारदर्शिता की दी जानकारी परामर्शदाता श्री दिनेश सोमकुवर ने समितियों को बैठक पंजी, कार्यक्रम आय-व्यय रजिस्टर एवं गतिविधि रजिस्टर के व्यवस्थित संधारण और मूल्यांकन की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने कहा कि कार्यों का उचित दस्तावेजीकरण समितियों की गतिविधियों को व्यवस्थित बनाने और पारदर्शिता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समितियों के सशक्तिकरण पर रहा विशेष जोर कार्यक्रम में नवांकुर सखी समिति के अध्यक्ष, सचिव एवं सदस्यों सहित श्रीमती शारदा निकम, श्री भोजराज निकम, श्री उमेश चचाने, श्री भीमराज बड़बाइक, श्री मोहन गोहेन, श्री शंकर राजूके, श्रीमती साधना बल्की, श्रीमती वर्षा भांगे, समाजसेवी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, दस्तावेजीकरण को मजबूत करना तथा जनभागीदारी के माध्यम से ग्रामीण विकास एवं सामाजिक जागरूकता की गतिविधियों को प्रभावी बनाना रहा।

प्रस्फुटन शक्ति संचय अभियान के तहत समितियों का क्षमतावर्धन प्रशिक्षण सम्पन्न

स्वयंसेवी संगठनों के रूप में विकास, संवाद कौशल और दस्तावेजीकरण की दी गई जानकारी

पांढुर्णा, 24 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के तत्वावधान में प्रस्फुटन शक्ति संचय अभियान के अंतर्गत प्रस्फुटन समितियों का क्षमतावर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्राम बनगांव, सेक्टर क्रमांक-1 में आयोजित किया गया। नवांकुर संस्था अवध विद्यापीठ शिक्षण समिति द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण में विभिन्न प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारियों ने सहभागिता कर समिति संचालन, संवाद कौशल एवं दस्तावेजीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ, जिला समन्वयक श्री अखिलेश जैन एवं विकासखंड समन्वयक श्री दिलीप आठनेरे के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ।

समितियों को सशक्त बनाने पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान विकासखंड समन्वयक श्री दिलीप आठनेरे ने मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उद्देश्यों, लक्ष्यों और आगामी गतिविधियों की जानकारी देते हुए समितियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। नवांकुर संस्था के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार मानकर ने प्रस्फुटन समितियों को व्यवस्थित एवं सक्रिय स्वयंसेवी संगठनों के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया समझाई।

मुख्य वक्ता श्री पंकज खिरेकर ने प्रभावी संवाद कौशल के महत्व तथा उसे विकसित करने के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं परामर्शदाता श्री मंगेश गजभिये ने समितियों के कार्यों, गतिविधियों और उपलब्धियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता एवं प्रक्रिया के बारे में बताया।

प्रतिभागियों को वितरित किए प्रमाण-पत्र

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। साथ ही प्रतिभागियों से प्रशिक्षण कार्यक्रम के संबंध में सुझाव एवं प्रतिक्रियाएं प्राप्त की गईं, ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

जनभागीदारी से सामाजिक विकास का संकल्प

कार्यक्रम में ग्राम सरपंच श्रीमती अर्चनाताई आहके, समाजसेवी श्री मनोहर राव पाबले, प्रस्फुटन समिति अध्यक्ष श्री रामदास मुरुमकर, प्राथमिक शाला प्रधान पाठक श्री राजेंद्र बनसोड, श्री चकोर बोबड़े, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती रत्नमाला, परामर्शदाता श्री प्रवीण साहू एवं श्रीमती वर्षा खुरसंगे, मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के छात्र श्री पारस बालपांडे, प्रस्फुटन समितियों के सदस्य तथा नवांकुर सखियां उपस्थित रहीं।

प्रशिक्षण के माध्यम से प्रस्फुटन समितियों की कार्यक्षमता बढ़ाने, संगठनात्मक मजबूती विकसित करने तथा सामाजिक विकास के कार्यों में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

जनजातीय गौरव दिवस के तहत महाविद्यालय में पौधारोपण, स्वच्छता अभियान चलाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश पांढुर्णा, 24 अक्टूबर। जनजातीय गौरव दिवस एवं रिफॉर्म्स उत्सव के अंतर्गत प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय विज्ञान महाविद्यालय पांढुर्णा में पौधारोपण एवं स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शहनाज खान के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पर्यावरण संरक्षण के लिए किया पौधारोपण मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार 22 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक जनजातीय गौरव दिवस एवं रिफॉर्म्स उत्सव के तहत विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में महाविद्यालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इसके साथ ही एनएसएस स्वयंसेवकों एवं छात्र-छात्राओं ने स्वच्छता अभियान चलाकर परिसर की साफ-सफाई की। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने लिया भाग कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गणेश तुमडाम, महिला इकाई की कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती कीर्ति सलामे, डॉ. एल.एल. राऊत, श्री पवन कुमार कोडापे, श्री भोजराज कराले, श्री मनोज खुरसंगे, श्री नयन साहारे एवं श्री संजय उईके सहित महाविद्यालयीन स्टाफ, एनएसएस स्वयंसेवक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का दिया संदेश इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना तथा स्वच्छ और हरित परिसर के निर्माण के लिए प्रेरित करना रहा।

🚨 NCIB NEWS | पांढुर्णा

चांगोबा में जनविश्वास अभियान का शिविर: अपर कलेक्टर ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, मौके पर बना दिव्यांगता पहचान पत्र

सिंधुरजना के ग्रामीणों ने भी रखीं समस्याएं, दूषित पेयजल, स्कूल की छत और पुलिया निर्माण का मुद्दा उठा; फौती नामांतरण की कार्रवाई भी हुई

पांढुर्णा | 23 अक्टूबर 2026।

मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत ग्राम चांगोबा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुना गया। अपर कलेक्टर श्रीमती ज्योति ठाकुर ने अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिविर में चांगोबा के साथ ग्राम सिंधुरजना के ग्रामीणों ने भी पहुंचकर अपनी समस्याएं रखीं।

📝 पेंशन से लेकर सड़क और पेयजल तक की समस्याएं उठीं

शिविर में ग्रामीणों ने वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन, सिकल सेल, गरीबी रेखा संबंधी परिचय पत्र, ई-केवाईसी, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति, मनरेगा जॉब कार्ड, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं।

इसके अलावा सीमेंट कंक्रीट सड़क निर्माण और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से संबंधित शिकायतें भी सामने आईं। अपर कलेक्टर ने संबंधित विभागों को आवेदनों की जांच कर प्राथमिकता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

♿ शिविर में ही बना विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र

शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने आरुषि जयदेव के सिकल सेल से संबंधित प्रकरण में मौके पर ही विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र बनाया। इससे शिविर में ही संबंधित हितग्राही को आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई गई।

🏡 स्वामित्व योजना के तहत फौती नामांतरण

अपर कलेक्टर श्रीमती ज्योति ठाकुर की उपस्थिति में स्वामित्व योजना के अंतर्गत फौती नामांतरण की कार्रवाई भी की गई। अधिकारियों को राजस्व संबंधी प्रकरणों का नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

🚰 सिंधुरजना में दूषित पानी और स्कूल की छत का मुद्दा

ग्राम सिंधुरजना के ग्रामीणों ने विद्यालय की छत की मरम्मत, पानी की टंकी की सफाई नहीं होने से दूषित पेयजल की समस्या और पुलिया निर्माण की मांग उठाई। संबंधित विभागों को इन समस्याओं पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।

🌱 अल्प वर्षा के बीच जल संरक्षण की अपील

अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्रीमती अलका एक्का ने चांगोबा और सिंधुरजना के ग्रामीणों को अल्प वर्षा के कारण संभावित पेयजल संकट के प्रति जागरूक किया। उन्होंने जल संसाधनों को ध्यान में रखकर रबी फसलों का चयन करने, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने और जल संरक्षण के उपाय अपनाने की अपील की।

📢 योजनाओं की जानकारी और जनगणना संबंधी कार्य

शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों को शासकीय जनकल्याणकारी योजनाओं, पात्रता और मिलने वाले लाभों की जानकारी दी। इसके साथ ही जनगणना संबंधी कार्य भी किया गया।

इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्रीमती अलका एक्का, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनय प्रकाश ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

NCIB NEWS की नजर: जनसमस्या निवारण शिविरों का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाकर उनका समयबद्ध निराकरण करना है। अब ग्रामीणों द्वारा उठाए गए दूषित पेयजल, विद्यालय की छत और पुलिया निर्माण जैसे मुद्दों पर संबंधित विभाग कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा।

NCIB NEWS | पांढुर्णा

खबर से हक़ीक़त तक…

🚨 NCIB NEWS | पांढुर्णा चांगोबा में जनविश्वास अभियान का शिविर: अपर कलेक्टर ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, मौके पर बना दिव्यांगता पहचान पत्र सिंधुरजना के ग्रामीणों ने भी रखीं समस्याएं, दूषित पेयजल, स्कूल की छत और पुलिया निर्माण का मुद्दा उठा; फौती नामांतरण की कार्रवाई भी हुई पांढुर्णा | 23 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत ग्राम चांगोबा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुना गया। अपर कलेक्टर श्रीमती ज्योति ठाकुर ने अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिविर में चांगोबा के साथ ग्राम सिंधुरजना के ग्रामीणों ने भी पहुंचकर अपनी समस्याएं रखीं। 📝 पेंशन से लेकर सड़क और पेयजल तक की समस्याएं उठीं शिविर में ग्रामीणों ने वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन, सिकल सेल, गरीबी रेखा संबंधी परिचय पत्र, ई-केवाईसी, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति, मनरेगा जॉब कार्ड, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। इसके अलावा सीमेंट कंक्रीट सड़क निर्माण और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से संबंधित शिकायतें भी सामने आईं। अपर कलेक्टर ने संबंधित विभागों को आवेदनों की जांच कर प्राथमिकता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। ♿ शिविर में ही बना विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने आरुषि जयदेव के सिकल सेल से संबंधित प्रकरण में मौके पर ही विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र बनाया। इससे शिविर में ही संबंधित हितग्राही को आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई गई। 🏡 स्वामित्व योजना के तहत फौती नामांतरण अपर कलेक्टर श्रीमती ज्योति ठाकुर की उपस्थिति में स्वामित्व योजना के अंतर्गत फौती नामांतरण की कार्रवाई भी की गई। अधिकारियों को राजस्व संबंधी प्रकरणों का नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। 🚰 सिंधुरजना में दूषित पानी और स्कूल की छत का मुद्दा ग्राम सिंधुरजना के ग्रामीणों ने विद्यालय की छत की मरम्मत, पानी की टंकी की सफाई नहीं होने से दूषित पेयजल की समस्या और पुलिया निर्माण की मांग उठाई। संबंधित विभागों को इन समस्याओं पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके। 🌱 अल्प वर्षा के बीच जल संरक्षण की अपील अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्रीमती अलका एक्का ने चांगोबा और सिंधुरजना के ग्रामीणों को अल्प वर्षा के कारण संभावित पेयजल संकट के प्रति जागरूक किया। उन्होंने जल संसाधनों को ध्यान में रखकर रबी फसलों का चयन करने, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने और जल संरक्षण के उपाय अपनाने की अपील की। 📢 योजनाओं की जानकारी और जनगणना संबंधी कार्य शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों को शासकीय जनकल्याणकारी योजनाओं, पात्रता और मिलने वाले लाभों की जानकारी दी। इसके साथ ही जनगणना संबंधी कार्य भी किया गया। इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्रीमती अलका एक्का, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनय प्रकाश ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। NCIB NEWS की नजर: जनसमस्या निवारण शिविरों का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाकर उनका समयबद्ध निराकरण करना है। अब ग्रामीणों द्वारा उठाए गए दूषित पेयजल, विद्यालय की छत और पुलिया निर्माण जैसे मुद्दों पर संबंधित विभाग कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा। NCIB NEWS | पांढुर्णा खबर से हक़ीक़त तक…

🚨 NCIB NEWS | ब्रेकिंग न्यूज़ पांढुर्णा में खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई, अवैध मुरुम उत्खनन और परिवहन करते दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त नांदनवाड़ी-बंधान में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान पकड़े गए वाहन, कलेक्टर न्यायालय में पेश होगा मामला; जुर्माने की कार्रवाई प्रस्तावित पांढुर्णा | 23 अक्टूबर 2026। जिले में अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन के खिलाफ खनिज विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की हैं। यह कार्रवाई कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देश पर तहसील पांढुर्णा के ग्राम नांदनवाड़ी-बंधान में की गई। जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर को खनिज विभाग के दल ने क्षेत्र में आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान खनिज मुरुम का अवैध उत्खनन एवं परिवहन करते हुए एक बिना पंजीयन क्रमांक का महिंद्रा ट्रैक्टर-ट्रॉली और दूसरा ट्रैक्टर क्रमांक MP22AA9135 ट्रॉली सहित पाया गया। खनिज विभाग की टीम ने दोनों वाहनों को खनिज नियमों के प्रावधानों के तहत जब्त कर लिया। जब्त वाहनों को उनमें लदे खनिज सहित पुलिस चौकी नांदनवाड़ी परिसर में शासकीय अभिरक्षा में खड़ा कराया गया है। ⚖️ अब कलेक्टर न्यायालय में होगी आगे की कार्रवाई खनिज विभाग द्वारा मामले में नियमानुसार प्रकरण दर्ज कर जुर्माना अधिरोपित करने के संबंध में निर्णय के लिए प्रकरण कलेक्टर न्यायालय, पांढुर्णा के समक्ष प्रस्तुत करने की कार्रवाई प्रस्तावित है। इस कार्रवाई के दौरान सहायक खनि अधिकारी श्री महेश नगपुरे सहित खनिज विभाग का संयुक्त दल मौजूद रहा। NCIB NEWS की नजर: जिले में अवैध खनन एवं खनिज परिवहन पर प्रशासन की कार्रवाई जारी है। अब देखना होगा कि प्रकरण में आगे क्या निर्णय होता है और नियमानुसार कितना जुर्माना लगाया जाता है। 📍 NCIB NEWS | पांढुर्णा खबर से हक़ीक़त तक…

NPPA Approves 30% Trade Margin Cap on 137 Anti-Cancer Drugs; Revised Prices to Take Effect from November 9

Move under DPCO, 2013 aims to curb excessive trade mark-ups, improve affordability and ensure uninterrupted availability of essential cancer medicines

The National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) has approved a trade margin rationalisation (TMR) mechanism for 137 non-scheduled anti-cancer drugs, capping trade margins at 30% of the maximum retail price (MRP), excluding GST. The revised prices will come into effect from November 9, 2026, and remain in force until further orders.

The revised prices of the identified non-scheduled anti-cancer drugs are expected to decrease by up to 70%, depending on their existing price structures. However, the actual reduction will vary from medicine to medicine.

The decision was taken at the Authority’s 284th overall and 152nd meetings under the Drugs (Prices Control) Order (DPCO), 2013, held on October 16 and 17, 2026, under the chairmanship of Manoj Joshi, Secretary, Department of Pharmaceuticals and Chairman of NPPA.

The intervention will be implemented under Paragraph 19 of DPCO, 2013, which empowers the government to take action in extraordinary circumstances in the public interest.

Price cap to curb excessive trade mark-ups

According to the meeting minutes, the Authority considered the need to address excessive trade mark-ups on non-scheduled anti-cancer medicines, citing market evidence, public-health concerns and the precedent set by a similar intervention in 2019.

The Authority decided to limit the trade margin to 30% of the MRP, excluding GST. This corresponds to a mark-up of 42.86% on the price to stockist or price to distributor (PTS/PTD), allowing a reasonable margin for the trade while seeking to prevent excessive increases in retail prices.

The measure follows deliberations at the Authority’s previous meeting on October 8, 2026, and is based on recommendations from an expert committee of the Ministry of Health and Family Welfare, which identified 137 anti-cancer drugs for inclusion in the exercise.

The 137 identified medicines include immunotherapy drugs used to treat more than 20 types of cancer, as well as Denosumab, used by breast and prostate cancer patients; Pegfilgrastim, used to prevent neutropenia in cancer patients; and Bevacizumab, approved for the treatment of certain cancers, including colorectal, ovarian and cervical cancer. The PIB release also highlighted medicines such as Pembrolizumab, Durvalumab and Osimertinib, whose revised MRPs are expected to improve affordability for cancer patients.

March 2026 prices to serve as the reference

NPPA has approved a mechanism for calculating revised MRPs using PTS/PTD data for March 2026 as the reference.

The PTS/PTD will be calculated by dividing the manufacturer’s net sales realisation for the relevant product during the reference month by the total quantity sold. If a manufacturer recorded no sales during March 2026, the calculation will use sales data for the period from April 2025 to March 2026.

All categories of sales will be considered, except government sales.

For formulations launched after March 31, 2026, the revised MRP will be calculated using the current PTS/PTD. Where manufacturers supply medicines directly to hospitals or medical institutions, the institutions will be treated as stockists or distributors, and the manufacturer’s invoice data will be used for the calculation.

Higher-priced formulations must be reduced

Manufacturers selling branded or generic versions of the covered medicines at prices above the newly calculated MRP will be required to reduce their prices accordingly. Where an existing MRP is lower than the calculated price, the lower price must be maintained.

The order will also cover patented medicines, except where an exemption has been approved under Paragraph 32 of DPCO, 2013.

The price-control mechanism will apply to non-scheduled formulations containing any of the listed drugs, whether used individually or in combination. Its coverage will extend across strengths, dosage forms and routes of administration, including formulations used for therapeutic indications other than cancer.

Following publication of the notification in the Official Gazette, earlier price orders fixing ceiling prices or retail prices under the relevant provisions of DPCO, 2013, where applicable, will stand superseded as specified in the order.

Manufacturers given seven days to submit revised prices

Manufacturers will have seven days from publication of the order in the Official Gazette to submit revised MRP information to NPPA and the concerned State Drug Controller, whether or not the MRP changes.

Consumers can check the revised prices of medicines through the NPPA website and the Pharma Sahi Daam mobile application. Manufacturers must disseminate revised price lists to retailers and hospitals, while hospitals are required to ensure that the applicable reduced prices are implemented from November 9, 2026.

They must also issue and submit the revised price list in Form V through the Integrated Pharmaceutical Database Management System (IPDMS) and provide copies to State Drug Controllers, dealers and other relevant entities within the same period.

Failure to submit the required information will be treated as non-reduction of MRP and may lead to action to recover overcharged amounts under the applicable provisions of DPCO, 2013.Retailers, dealers, hospitals and medical institutions will be required to prominently display the applicable price lists and supplementary price lists.

Patient assistance programmes receive conditional exemption

The order provides for the exclusion of quantities supplied free of cost to patients under manufacturers’ Patient Assistance Programmes (PAP) from PTS/PTD and MRP calculations for trade-margin capping, subject to specified conditions.Manufacturers will have to furnish an undertaking to NPPA and maintain detailed patient records, including identity and residence documents, disease and prescription details, and records of medicines imported, received and consumed.

The medicines must be used exclusively for the specified purpose. NPPA will retain the authority to seek additional information, conduct audits and inspections, and verify programme implementation. Non-compliance may result in the relevant quantities losing the exemption.

Supply continuity and regulatory monitoringAlongside price regulation, NPPA has emphasised the need to maintain uninterrupted supplies of the covered medicines.

Manufacturers will be required to maintain current production levels. Any manufacturer proposing to reduce average monthly production must obtain prior permission from NPPA. Those intending to discontinue production or imports must submit the prescribed information in Form IV of Schedule II of DPCO, 2013, at least six months before the proposed discontinuation date.

Hospitals and medical institutions, which account for a substantial share of anti-cancer medicine purchases, have also been asked to monitor MRPs and report violations to NPPA.

State Drug Controllers will oversee compliance by manufacturers, dealers, hospitals and medical institutions. NPPA may initiate recovery proceedings in cases of overcharging.

Annual price increases remain subject to the cap

Manufacturers may continue to avail themselves of annual price increases under Paragraph 20(1) of DPCO, 2013, provided they remain compliant with the maximum permissible trade margin specified in the order.

The measure represents a significant regulatory intervention in the non-scheduled anti-cancer medicines segment, seeking to balance reasonable trade margins with patient affordability and reliable medicine supplies.

The revised prices are scheduled to take effect on November 9, 2026, subject to publication of the order in the Official Gazette and the requirements specified therein.

A Step Towards Affordable Cancer Care and Better Patient Outcomes

Beyond price regulation, this decision could bring meaningful relief to cancer patients and their families, who often face substantial financial hardship during prolonged treatment. More affordable medicines may help patients adhere to prescribed treatment, reduce the likelihood of interruptions due to financial constraints, and ease the emotional and economic stress experienced by caregivers. The initiative could also promote greater transparency in medicine pricing and strengthen public confidence in the healthcare system. However, its real impact will depend on effective implementation, actual reductions in the prices of individual medicines, and consistent availability across hospitals, pharmacies and rural healthcare facilities. Ultimately, the move reinforces the principle that access to essential cancer treatment should not be determined solely by a patient’s financial circumstances, but should remain a priority in the pursuit of equitable, compassionate and patient-centred healthcare.

नासिक में जहरीले क्रोमियम का खतरा: क्या 2027 के कुंभ में सुरक्षित होगा गोदावरी का जल?

NCIB News | रिपोर्टर: मनीष जैन

नासिक, 15 अक्टूबर 2026: वर्ष 2027 में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले नासिक में भूजल में जहरीले क्रोमियम की अत्यधिक मात्रा मिलने की खबर ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। दक्षिण एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) की 8 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अंबड औद्योगिक क्षेत्र के दत्तानगर में आवासीय बोरवेल के पानी में क्रोमियम का खतरनाक स्तर पाया गया है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि दूषित पानी एक स्थानीय नाले के माध्यम से कुंभ मेले के स्नान घाट के पास गोदावरी नदी में पहुंच रहा है।

प्रेस विज्ञप्ति में प्रस्तुत आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। SANDRP के अनुसार, एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के दौरान पानी में हेक्सावैलेंट क्रोमियम 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर और कुल क्रोमियम 50.5 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। कुल क्रोमियम की यह मात्रा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित पेयजल की 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर की अधिकतम स्वीकार्य सीमा से लगभग 1,010 गुना अधिक है।

इन निष्कर्षों ने औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण, स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य और आगामी कुंभ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, भूजल में दर्ज क्रोमियम की मात्रा को सीधे गोदावरी नदी के पानी की मात्रा नहीं माना जा सकता। नदी और प्रत्येक स्नान घाट की वास्तविक स्थिति का पता प्रयोगशाला जांच से ही लगाया जा सकता है।

बच्चों के शरीर पर छाले और त्वचा पर गंभीर घाव होने की शिकायत

SANDRP की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दूषित पानी के संपर्क में आने वाले लोगों ने त्वचा पर चकत्ते, छाले और धीरे-धीरे भरने वाले गहरे घाव होने की शिकायत की है। संगठन ने बच्चों के शरीर पर व्यापक त्वचा संबंधी चोटें देखे जाने का उल्लेख किया है। इसके अलावा, कुछ लोगों में लिम्फ नोड्स में सूजन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की भी जानकारी दी गई है।

SANDRP का आरोप है कि नगर निगम की ओर से पानी की अपर्याप्त और अनियमित आपूर्ति के कारण कुछ परिवार नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने के लिए भी बोरवेल के पानी पर निर्भर हैं। संगठन के मुताबिक, कुछ कामकाजी परिवार अपनी मासिक आय का लगभग आधा हिस्सा इलाज, घावों की ड्रेसिंग और वैकल्पिक आवास पर खर्च कर रहे हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में प्रभावित बस्ती की दो महिलाओं के गर्भपात होने की भी जानकारी दी गई है। हालांकि, इन घटनाओं और क्रोमियम के संपर्क के बीच प्रत्यक्ष कारणात्मक संबंध स्थापित नहीं हुआ है। इसके लिए उचित चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।

गोदावरी नदी तक प्रदूषण पहुंचने की आशंका

आगामी कुंभ मेले के संदर्भ में सबसे गंभीर चिंता SANDRP का यह आरोप है कि दूषित पानी एक स्थानीय नाले के जरिए गोदावरी नदी में पहुंच रहा है। संगठन के अनुसार, यह नाला कुंभ मेले के एक स्नान घाट के पास नदी में मिलता है।

SANDRP ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) से नंदिनी नदी/धारा और संदिग्ध प्रदूषण स्थल के नीचे गोदावरी के पानी की तत्काल जांच करने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा है कि प्रदूषण कितनी दूर तक फैला है, इसका पता लगाया जाए और आवश्यकता पड़ने पर नदी के निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों तथा अन्य जल उपयोगकर्ताओं को सतर्क किया जाए।

प्रेस विज्ञप्ति में गोदावरी नदी के पानी में क्रोमियम की वास्तविक मात्रा का कोई प्रयोगशाला परिणाम नहीं दिया गया है। इसलिए यह अभी स्थापित नहीं है कि नदी के किन-किन हिस्सों, स्नान घाटों या तालाबों में प्रदूषण मौजूद है। इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच से होनी आवश्यक है।

औद्योगिक इकाइयों और सरकारी कार्रवाई पर सवाल

SANDRP ने आरोप लगाया है कि पीले रंग के पानी की खबरें सामने आने के बाद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 30 सितंबर 2026 को केवल एक कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। संगठन ने पानी की जांच के नतीजों को सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

संगठन ने अंबड औद्योगिक क्षेत्र में इलेक्ट्रोप्लेटिंग, मेटल फिनिशिंग, पेंट और अन्य संभावित प्रदूषणकारी उद्योगों की व्यापक जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा, सभी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दूषित पानी की आपूर्ति रोकने और पर्यावरणीय सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है।

प्रदूषण का वास्तविक स्रोत, पर्यावरण को हुए नुकसान की सीमा और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई की पर्याप्तता की जांच सक्षम प्राधिकारियों द्वारा की जानी आवश्यक है।

क्या असुरक्षित स्नान व्यवस्था मानवाधिकारों का सवाल बन सकती है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की न्यायिक व्याख्या में स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण संरक्षण शामिल हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना और पर्यावरणीय नुकसान को रोकना भी सरकार की जिम्मेदारियों में आता है।

यदि वैज्ञानिक जांच से यह स्थापित होता है कि कोई निर्धारित स्नान घाट गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है, तो पर्याप्त चेतावनी और सुरक्षा उपायों के बिना लोगों को वहां स्नान करने देना मानवाधिकार और सार्वजनिक कानून से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

हालांकि, केवल भूजल के इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरी गोदावरी नदी या कुंभ मेले के सभी स्नान घाट दूषित हैं। मुख्य सवाल यह है कि क्या सरकार व्यापक जांच कराएगी, परिणाम सार्वजनिक करेगी और जहां गंभीर जोखिम सामने आएगा, वहां समय रहते उचित कार्रवाई करेगी।

क्या लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने से पहले सरकार सभी निर्धारित स्नान घाटों की सुरक्षा प्रमाणित करेगी, या कुंभ मेले के नजदीक आने तक पानी की गुणवत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित रहेंगे?

सुरक्षित स्नान व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करना जरूरी

SANDRP ने संदिग्ध नाले, नंदिनी नदी/धारा और गोदावरी के संबंधित हिस्सों की तत्काल जांच की मांग की है। सभी निर्धारित स्नान घाटों की स्वतंत्र जांच और परिणामों को सार्वजनिक करना वास्तविक जोखिम का आकलन करने के लिए आवश्यक होगा।

यदि किसी स्थान पर पानी असुरक्षित पाया जाता है, तो धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए वहां स्नान पर उचित प्रतिबंध और सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार किया जाना चाहिए।

प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को सुरक्षित पानी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, प्रदूषण के स्रोत की पहचान कर उसे रोकने, गोदावरी की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर जनसुरक्षा सुनिश्चित करने की होनी चाहिए।

2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या प्रशासन समय रहते पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ यह सुनिश्चित कर पाएगा कि श्रद्धालुओं को ऐसे स्वास्थ्य जोखिमों का सामना न करना पड़े, जिन्हें रोका जा सकता है।

🚨 NCIB NEWS बड़ी खबर

निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी में ग्राहकों की जमा राशि वापसी को लेकर परेशानी, बार-बार चक्कर लगाने को मजबूर ग्राहक!

सौंसर शाखा से जुड़ा मामला, जमा रकम वापस मिलने में देरी की शिकायतें; ग्राहकों को राहत दिलाने के लिए जिम्मेदारों से जवाब की मांग

सौंसर, पांढुर्णा। निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड की सौंसर शाखा में ग्राहकों की जमा राशि वापस मिलने को लेकर परेशानी सामने आने की बात कही जा रही है। कुछ ग्राहकों के अनुसार, अपनी ही जमा पूंजी वापस प्राप्त करने के लिए उन्हें बार-बार शाखा के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद राशि कब तक वापस मिलेगी, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से ग्राहकों की चिंता बढ़ रही है।

अपनी ही जमा पूंजी के लिए परेशान ग्राहक!

ग्राहकों के लिए बैंक या सहकारी संस्था में जमा राशि उनकी मेहनत की कमाई और भविष्य की जरूरतों का सहारा होती है। ऐसे में यदि जमा रकम समय पर वापस नहीं मिलती, तो परिवारों के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। ग्राहकों को बार-बार शाखा जाना पड़े और भुगतान की निश्चित समय-सीमा स्पष्ट न हो, तो व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

शाखा प्रबंधन और मुख्यालय से जवाब की अपेक्षा

सौंसर शाखा से संबंधित इस मामले में ग्राहकों की शिकायतों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाना आवश्यक है। संस्था के शाखा प्रबंधन और नागपुर स्थित मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि जमा राशि की वापसी में देरी क्यों हो रही है, प्रभावित ग्राहकों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई है और उनकी राशि लौटाने के लिए क्या समय-सीमा निर्धारित की गई है।

क्या ग्राहकों को मिलेगा उनकी जमा पूंजी का पैसा?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपनी जमा राशि वापस पाने के लिए परेशान ग्राहकों को राहत कब मिलेगी? संबंधित सहकारी एवं वित्तीय नियामक अधिकारियों को भी शिकायतों की प्रकृति के अनुसार मामले की जांच कर उचित कार्रवाई पर विचार करना चाहिए।

NCIB NEWS का सवाल: जब ग्राहक अपनी मेहनत की कमाई किसी संस्था में सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जमा करते हैं, तो राशि वापस लेने के लिए उन्हें बार-बार चक्कर क्यों लगाने पड़ें? ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी, शिकायतों का समयबद्ध निराकरण और नियमानुसार उनकी पात्र जमा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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