CM Suvendu Adhikari Lays Foundation Stone for 2,000-Bed Adani Arogya Mandir in Kolkata

Kolkata, September 24, 2026: West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari laid the foundation stone for the proposed 2,000-bed Adani Arogya Mandir at the Bengal Silicon Valley Tech Hub in New Town, Kolkata, describing the project as a major step towards building an integrated healthcare ecosystem in Bengal.

The proposed medical institution, to be developed by the Adani Foundation, will involve an investment of more than ₹4,000 crore and will be spread across 51.75 acres. According to the Adani Group, the facility is expected to serve more than 2 lakh inpatients and over 20 lakh outpatients annually and create approximately 10,000 jobs across the healthcare ecosystem.

CM Adhikari: “Not just a hospital campus”

Speaking at the foundation-stone ceremony, Chief Minister Suvendu Adhikari said the project should be viewed as more than a hospital campus and expressed his expectation that it would contribute to rebuilding and developing Bengal.

“Mr Adani, we look forward to your presence to rebuild Bengal. The final vision is not just a hospital campus, it will be a fully integrated healthcare city. Nowhere in India is there a hospital of this high standard. The hospital will give a big boost to medical tourism. This is historic, meaningful and an auspicious day for us. Viksit Bharat 2047 can happen only if Bengal develops,”

Chief minister Suvendu Adhikari

The Chief Minister’s remarks placed healthcare infrastructure, medical tourism and Bengal’s broader economic development at the centre of the project.

2,000-bed healthcare institution

The proposed Adani Arogya Mandir will be a multi-speciality hospital with step-down and transitional care facilities. The campus will also include a Meditel and Vishram Gruh to provide accommodation for relatives of patients receiving treatment.

Adani Group Chairman Gautam Adani said the institution would be a not-for-profit medical centre, with 1,000 of its 2,000 beds intended for economically weaker sections eligible under state and central health insurance schemes.

Focus on cancer care and medical education

The first phase of the hospital is planned to focus on cancer care, providing advanced tertiary and specialised healthcare services.The campus will also feature a medical college with an annual intake of 150 undergraduate students, more than 100 postgraduate students and over 40 super-specialists. A College of Nursing and an institution for allied healthcare and paramedical education are also planned.

The proposed research ecosystem will cover areas such as genomics, precision medicine, biomedical informatics, artificial intelligence, clinical trials and molecular and applied biomedical sciences.

The Adani Foundation has engaged Mayo Clinic Global Consulting and Singapore’s SingHealth to bring expertise in clinical care, academic medicine, digital health, quality, workforce development and innovation.

CM’s development vision and ₹1 lakh crore roadmap

The foundation-stone ceremony also saw the announcement of an investment roadmap of more than ₹1 lakh crore in West Bengal by 2035 by the Adani Group.

The proposed investments will cover ports, logistics, renewable energy, power generation, power transmission and distribution, roads and bridges, green cement and hyperscale data centres.

For the Chief Minister, the healthcare project comes as part of a wider development vision for Bengal, with the proposed medical city expected to combine healthcare delivery, medical education, research and specialised treatment.

Heritage and cultural initiatives

The Adani Group also signed two MoUs with the West Bengal government concerning the restoration of the historic Writers’ Building and support for Kolkata’s Durga Puja ecosystem through Adani Pujo Preview.

Support for the revitalisation of Kumartuli Ghat was also announced.

The proposed Adani Arogya Mandir is therefore positioned as one component of a wider set of healthcare, infrastructure, heritage and cultural initiatives announced during the Chief Minister’s foundation-stone ceremony.

डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: असम, मिजोरम और मुंबई में 35 करोड़ रुपये से अधिक की तस्करी सामग्री जब्त

नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026: सीमा पार तस्करी के खिलाफ जारी अभियान में डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए असम, मिजोरम और मुंबई में विदेशी मूल की सुपारी, खसखस और सोना जब्त किया है। इन अलग-अलग अभियानों में जब्त सामग्री का कुल अनुमानित मूल्य 35.12 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।

डीआरआई के अनुसार, मिजोरम और असम में की गई कार्रवाई में 1,25,680 किलोग्राम विदेशी मूल की सुपारी और 41,697 किलोग्राम विदेशी मूल का खसखस बरामद किया गया, जिसकी संयुक्त कीमत करीब 20.31 करोड़ रुपये है। वहीं मुंबई एयरपोर्ट पर एक अलग कार्रवाई में 9.40 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना, जिसकी कीमत करीब 14.81 करोड़ रुपये है, जब्त किया गया।

भारत-म्यांमार सीमा के पास बड़ी सुपारी बरामदगी

23-24 सितंबर को मिजोरम के चंफाई जिले में डीआरआई ने कस्टम्स चंफाई, असम राइफल्स की 14वीं बटालियन और चंफाई पुलिस के सहयोग से रुआंतलांग गांव के आसपास तीन गोदामों की तलाशी ली।

ये गोदाम भारत-म्यांमार सीमा से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित थे और तलाशी के समय बंद एवं लावारिस पाए गए। तलाशी के दौरान 1,25,680 किलोग्राम संदिग्ध विदेशी मूल की सुपारी, जिसकी कीमत लगभग 14 करोड़ रुपये है, बरामद की गई। इसके अलावा 25,440 किलोग्राम खसखस, जिसकी कीमत लगभग 3.81 करोड़ रुपये बताई गई, भी मिला।

प्रारंभिक जांच में संकेत मिला कि इन वस्तुओं को म्यांमार से भारत में तस्करी के जरिए लाया गया था। सामान को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत जब्त किया गया।

डीआरआई ने इस सुपारी बरामदगी को उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में हाल के वर्षों में हुई सबसे बड़ी बरामदगियों में से एक बताया है।

असम में दो ट्रकों से 16 टन से अधिक खसखस बरामद

22 सितंबर को विशेष खुफिया सूचना के आधार पर डीआरआई अधिकारियों ने असम राइफल्स की 38वीं बटालियन की सहायता से सिलचर के पास लैलापुर में दो ट्रकों को रोका।

वाहनों की विस्तृत जांच के दौरान 290 एचडीपीई बैगों में 16,257 किलोग्राम विदेशी मूल का खसखस बरामद हुआ। इसकी अनुमानित कीमत करीब 2.43 करोड़ रुपये बताई गई है।

डीआरआई के अनुसार, बैगों पर विदेशी निर्माण एवं व्यापार से संबंधित चिह्न थे और खेप के साथ वैध आयात दस्तावेज मौजूद नहीं थे। खसखस और दोनों वाहनों को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत जब्त किया गया तथा परिवहन में शामिल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।

डीआरआई ने बताया कि खसखस विदेश व्यापार नीति के ITC (HS) वर्गीकरण के तहत एक ‘Restricted’ वस्तु है और इसके आयात के लिए निर्धारित शर्तों का पालन आवश्यक है।

मुंबई एयरपोर्ट पर खाने के सामान में छिपाकर लाया गया सोना

इसी बीच मुंबई में डीआरआई की एक अलग कार्रवाई में सोने की तस्करी का एक असामान्य तरीका सामने आया।

डीआरआई मुंबई जोनल यूनिट ने 23 सितंबर की सुबह दुबई से मुंबई पहुंचे तीन भारतीय यात्रियों को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विशेष सूचना के आधार पर रोका। एयर इंटेलिजेंस यूनिट और मुंबई एयरपोर्ट कस्टम्स की सहायता से उनके सामान की विस्तृत जांच की गई।

जांच में सामने आया कि विदेशी मूल के सोने को बारीक पाउडर में बदलकर मिल्क पाउडर, ओट्स, विभिन्न प्रकार के आटे, न्यूटेला और नारियल के दूध के पाउडर जैसे सामान्य खाद्य उत्पादों में मिलाया गया था।

तीनों यात्रियों के सामान से करीब 33.50 किलोग्राम ऐसे खाद्य उत्पाद बरामद हुए जिनमें सोने का पाउडर मिला हुआ था। अलग करने और जांच के बाद 9.40 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद किया गया, जिसकी कीमत लगभग 14.81 करोड़ रुपये आंकी गई।

सोने को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के संबंधित प्रावधानों के तहत जब्त किया गया। पूछताछ के दौरान तीनों यात्रियों ने कथित तौर पर एक ही संगठित सोना तस्करी सिंडिकेट की ओर से काम करने की बात स्वीकार की। तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

अलग-अलग तरीकों से तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई

डीआरआई की इन कार्रवाइयों में तस्करी के अलग-अलग तरीकों की तस्वीर सामने आती है। भारत-म्यांमार सीमा से बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादों की कथित तस्करी से लेकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खाद्य पदार्थों में सोने का पाउडर छिपाने तक, तस्कर जांच एजेंसियों से बचने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं।

असम और मिजोरम की कार्रवाइयों में बड़ी मात्रा में विदेशी मूल की सुपारी और प्रतिबंधित श्रेणी का खसखस जब्त किया गया, जबकि मुंबई में अत्यधिक छिपाव वाले तरीके से लाया जा रहा करोड़ों रुपये का सोना पकड़ा गया।

डीआरआई के अनुसार, इन कार्रवाइयों में कुल मिलाकर 35.12 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की सामग्री जब्त की गई और सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का कहना है कि ये कार्रवाई भारत-म्यांमार सीमा तथा अन्य संवेदनशील मार्गों से संचालित तस्करी नेटवर्क को रोकने के प्रयासों का हिस्सा हैं।

FSSAI Proposes Ban on Use of ‘Paneer’ Label for Non-Milk Products, Seeks to Prevent Consumer Confusion

New Delhi, September 24, 2026: The Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) has proposed a significant amendment to food safety regulations aimed at preventing non-milk-derived analogue products from being marketed or labelled as “Paneer.”

The proposed Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Amendment Regulations, 2026 seek to specifically address products described as “paneer” despite being made from constituents that are not derived from milk.

Only milk-derived products to be represented as ‘Paneer’

Under the proposed amendment, a new clause would be inserted under Regulation 2.1.1 of the existing Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Regulations, 2011.

The amendment would cover “paneer made of constituents not derived from milk.” Products that are already licensed or registered under the ‘Analogue in Dairy Context’ category would have to discontinue the use of the term “Paneer” in their nomenclature, labelling and marketing.

The move is aimed at ensuring that consumers can clearly distinguish between genuine milk-derived paneer and products made using non-milk ingredients.

Focus on informed consumer choiceFSSAI’s proposal comes against the backdrop of growing availability of dairy analogues and plant- or non-milk-based products in the food market. While such products may have their own legitimate uses and markets, the proposed regulatory change focuses on how they are described and presented to consumers.

According to FSSAI, the nomenclature and presentation of food products should accurately reflect their nature and composition. The proposed restriction is therefore intended to reduce the possibility of consumers purchasing a non-milk product believing it to be conventional paneer.

Existing analogue products could face labelling changes

An important aspect of the proposal is its impact on products already licensed or registered in the ‘Analogue in Dairy Context’ category. If the amendment is finalised in its proposed form, such products would no longer be able to use “Paneer” as part of their nomenclature, labelling or marketing.

This could require manufacturers and food businesses to review product names, packaging and promotional material to ensure compliance with the amended regulations.

Public invited to submit objections and suggestions

The amendment is still at the draft stage and has not yet become a final regulation. FSSAI has invited objections and suggestions from stakeholders as well as members of the public.

The draft will be considered after the expiry of 60 days from the date copies of the relevant Official Gazette notification are made available to the public.

Suggestions and objections may be submitted to the Chief Executive Officer, FSSAI, FDA Bhawan, Kotla Road, New Delhi–110002, or through the email address specified in the notification.

What the proposal could mean for consumers

If ultimately notified in its proposed form, the amendment would establish a clearer distinction in the marketplace between milk-derived paneer and non-milk-derived analogue products.

For consumers, the intended effect is straightforward: the name and presentation of a food product should provide a clearer indication of what it actually contains, allowing purchasing decisions to be based on accurate information.

The proposal has been issued by FSSAI with the previous approval of the Central Government under the Food Safety and Standards Act, 2006. The principal Prohibition and Restrictions on Sales Regulations were notified in 2011 and have been amended periodically.

The proposal remains subject to the consultation process, and its final provisions may differ from the draft.

🇮🇳 सेवा संकल्प अभियान को लेकर पांढुर्णा में पत्रकार वार्ता 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा देशव्यापी अभियान पांढुर्णा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन में सेवा, समर्पण, सुशासन एवं राष्ट्र निर्माण के 25 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जाएगा। इसी क्रम में आज भाजपा जिला कार्यालय, पांढुर्णा में आयोजित पत्रकार वार्ता को मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त पद्मश्री श्री मोहन नागर जी ने संबोधित किया। पत्रकार वार्ता में श्री मोहन नागर ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सेवा, जनकल्याण, जनसंपर्क एवं सामाजिक सहभागिता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों तथा आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य सेवा और जनकल्याण की भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए अभियान को व्यापक जनअभियान बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रदेश प्रवक्ता श्री अजय धवले जी, भाजपा जिला महामंत्री एवं जिला संयोजक श्री देवेन्द्र गायकवाड़ जी सहित जिले के पत्रकार बंधु उपस्थित रहे। 📍स्थान — भाजपा जिला कार्यालय, पांढुर्णा 🗓️ अभियान — 17 सितंबर से 17 अक्टूबर

🚨 कॉम्बिंग गश्त में पांढुर्णा पुलिस की बड़ी कार्रवाई

लंबे समय से फरार 14 वारंटी गिरफ्तार, 4 स्थाई और 10 गिरफ्तारी वारंटियों पर शिकंजा

पांढुर्णा, 13 सितंबर 2026। जिले में फरार आरोपियों एवं स्थाई तथा गिरफ्तारी वारंटियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना पांढुर्णा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 वारंटियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधीक्षक श्री प्रकाश चंद्र परिहार एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मनकामना प्रसाद के निर्देशन में चल रहे अभियान के दौरान थाना पांढुर्णा पुलिस ने कॉम्बिंग गश्त कर विभिन्न संभावित स्थानों पर दबिश दी। कार्रवाई में 4 स्थाई वारंटी एवं 10 गिरफ्तारी वारंटी पुलिस के हत्थे चढ़े।

🔴 स्थाई वारंटी गिरफ्तार

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए स्थाई वारंटियों में रामेश्वर धुर्वे, लक्ष्मण सिरसाम, विनोद इरपाची एवं प्रवीण इरपाची शामिल हैं।

🔵 गिरफ्तारी वारंटी भी पकड़े गए

वहीं गिरफ्तारी वारंटियों में गोपाल उईके, सुखदेव कसर, निलेश इवनाती, सूरज बारंगे, सुभाष उईके, प्यारेलाल उईके, राहुल येरपूरे, शीला बाई चोपड़े, रमेश रबड़े एवं अंकित रबड़े को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार किए गए सभी वारंटियों के विरुद्ध पुलिस द्वारा नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

👮 पुलिस टीम की अहम भूमिका

पूरी कार्रवाई थाना प्रभारी पांढुर्णा निरीक्षक अमित कुमार दानी के नेतृत्व में थाना पांढुर्णा पुलिस टीम एवं पुलिस चौकी नांदनवाड़ी के स्टाफ द्वारा की गई।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में फरार आरोपियों एवं वारंटियों की धरपकड़ के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा।

NCIB NEWS | पांढुर्णा

आधी रात किसानों की पुकार पर पहुंचे राहुल मोहोड़, RTO कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल

पांढुर्णा। किसानों की शिकायत पर भाजपा जिला पांढुर्णा के पूर्व महामंत्री राहुल मोहोड़ देर रात करीब 2 बजे मौके पर पहुंचे। कृषि कार्य में लगे वाहनों को लेकर किसानों द्वारा कथित अवैध वसूली और अनावश्यक कार्रवाई की शिकायत किए जाने के बाद उन्होंने मौके पर पहुंचकर संबंधित RTO कर्मियों से किसानों को परेशान किए जाने को लेकर सवाल किए।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, अवैध वसूली के आरोपों को लेकर पूछताछ के दौरान RTO से जुड़े कर्मचारी मौके से चले गए। वहीं, राहुल मोहोड़ द्वारा मौके पर मौजूद वाहन के दस्तावेज और वर्क ऑर्डर को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

राहुल मोहोड़ ने किसानों से कहा कि उनकी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा और यदि किसी किसान के साथ नियम विरुद्ध कार्रवाई या वसूली हुई है तो उसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी।

🌾 “किसान परेशान है तो रात-दिन नहीं देखेंगे”

राहुल मोहोड़ ने कहा कि किसानों की समस्या छोटी हो या बड़ी, उनकी आवाज उठाना जरूरी है। किसान कृषि कार्य में व्यस्त हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने किसानों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

इस दौरान मंडल अध्यक्ष प्रभाकर बोबडे, महामंत्री दिनेश रायकवार, युवा मोर्चा महामंत्री प्रफुल देवतले, रोशन चौरे, रजनीश कोहले, कोल्हटकर सहित मोहखेड़ क्षेत्र के किसान मौजूद रहे।

अब देखना होगा कि किसानों द्वारा लगाए गए अवैध वसूली एवं अनावश्यक कार्रवाई के आरोपों पर संबंधित RTO विभाग की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।

किसानों का सवाल—नियमों का पालन हो, लेकिन कृषि कार्य में लगे किसानों को अनावश्यक परेशानी क्यों?

ई-कॉमर्स कंपनियों पर सरकार की सख्ती, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम; Search Results से लेकर Sponsored Listings तक बदले नियम

नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026: ऑनलाइन खरीदारी करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के हितों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने ई-कॉमर्स क्षेत्र के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026 को अधिसूचित किया है। नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य डिजिटल बाजार में उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना है। साथ ही, ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए कारोबार करने में आसानी और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

शिकायतों के निपटारे में बढ़ेगी जवाबदेही

नए नियमों के तहत प्रत्येक ई-कॉमर्स कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) की कन्वर्जेंस प्रक्रिया का हिस्सा बनना होगा। इससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय उपभोक्ता शिकायत निवारण व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद है।

सरकार के मुताबिक, वर्ष 2025 में NCH को कुल 17,71,622 शिकायतें मिलीं। इनमें 5,11,196 शिकायतें यानी करीब 29 प्रतिशत ई-कॉमर्स क्षेत्र से संबंधित थीं।

इसके अलावा, कंपनी के शिकायत अधिकारी के पास दर्ज की गई शिकायत की एक प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा।

Search Results में नहीं चलेगा खेल

नए नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियां ऐसे तरीके से Search Results को प्रभावित नहीं कर सकेंगी, जिससे उपभोक्ता गुमराह हो या उसके सर्च से संबंधित परिणामों की प्रासंगिकता प्रभावित हो।इसका उद्देश्य ऐसे डिजिटल तरीकों पर रोक लगाना है, जिनसे उपभोक्ता को किसी खास उत्पाद या सेवा की ओर अनुचित तरीके से निर्देशित किया जाता है।

Sponsored Products की पहचान होगी जरूरी

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाले Sponsored Listings को स्पष्ट और प्रमुख तरीके से चिह्नित करना होगा। यानी उपभोक्ता को यह समझने में आसानी होनी चाहिए कि कोई उत्पाद सामान्य सर्च रिजल्ट का हिस्सा है या भुगतान किए गए प्रचार के कारण ऊपर दिखाया जा रहा है।

Discount का दावा तो पुरानी कीमत भी दिखानी होगी

कीमतों में कटौती दिखाने वाले ऑफर्स के लिए भी नए नियम महत्वपूर्ण हैं। जब किसी वस्तु या सेवा पर Price Reduction का दावा किया जाएगा, तो नई कीमत के साथ पिछली कीमत भी प्रदर्शित करनी होगी।

नियमों के अनुसार, ‘Prior Price’ वह सबसे कम कीमत होगी जिस पर संबंधित वस्तु या सेवा को छूट की घोषणा से पहले के 30 दिनों के दौरान पेश किया गया था।

इससे कथित तौर पर बढ़ी हुई पुरानी कीमत दिखाकर बड़ी छूट का भ्रम पैदा करने जैसी प्रथाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

Dark Patterns पर भी सख्ती

ई-कॉमर्स कंपनियों को Dark Patterns की रोकथाम और विनियमन के लिए 2023 में जारी दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।

इसके साथ कंपनियों को हर साल Self-Audit करना होगा और अनुपालन का प्रमाणपत्र प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।

Dark Patterns में ऐसे डिजिटल डिजाइन और तकनीकें शामिल होती हैं, जिनका इस्तेमाल उपभोक्ता के निर्णय को प्रभावित करने या उसे ऐसे विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करने में किया जाता है, जिन्हें वह सामान्य परिस्थितियों में शायद न चुनता।

Product और Seller की जानकारी देना होगा

Marketplace ई-कॉमर्स कंपनियों को उपभोक्ताओं को उत्पाद और विक्रेता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

इसमें Best Before/Use Before Date, Return और Refund की शर्तें, Warranty, Delivery और Payment से जुड़ी जानकारी शामिल है।

इसका उद्देश्य खरीदारी से पहले उपभोक्ताओं को पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अधिक सूचित निर्णय ले सकें।

Consumer Data के इस्तेमाल पर भी नियम

नए प्रावधानों के तहत Marketplace ई-कॉमर्स कंपनियां उपभोक्ता की जानकारी का कुछ निर्धारित उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल स्पष्ट और सकारात्मक सहमति (Express and Affirmative Consent) के बिना नहीं कर सकेंगी।

अलग सेवाओं के नाम पर Bundled Fees पर रोक

Marketplace प्लेटफॉर्म ऐसी सेवाओं के लिए Bundled Fees नहीं वसूल सकेंगे, जो ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से संबंधित नहीं हैं। हालांकि, निर्धारित शर्तों के अधीन Loyalty या Membership Programmes को अपवाद दिया गया है।

Imported Products पर Country of Origin बताना अनिवार्य

आयातित वस्तुओं के मामले में Importer की जानकारी और Country of Origin का खुलासा करना होगा। इससे उपभोक्ता को यह जानने में मदद मिलेगी कि उत्पाद किस देश का है और उसे भारत में किस आयातक के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है।

1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम

सरकार के अनुसार, Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020 पहले से ही ई-कॉमर्स क्षेत्र में उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से सुरक्षा देने के लिए नियामक ढांचा प्रदान करते हैं। 2026 के संशोधन डिजिटल बाजार में बदलते बिजनेस मॉडल और उपभोक्ताओं की बदलती अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।

सरकार का लक्ष्य ई-कॉमर्स क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना है, ताकि डिजिटल बाजार का विस्तार उपभोक्ता हितों की कीमत पर न हो।

नए Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026 देशभर में 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।

निमनी में पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्याबाई होलकर की पुण्यतिथि पर छायाचित्र का अनावरण

निमनी। पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्याबाई होलकर जी की पुण्यतिथि के अवसर पर धनगर समाज समिति, निमनी की ओर से ग्राम पंचायत निमनी के वार्ड क्रमांक 8 स्थित चौक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा जिला पांढुर्णा अध्यक्ष श्री संदीप भाऊ मोहोड जी की गरिमामयी उपस्थिति में राजमाता अहिल्याबाई होलकर जी के छायाचित्र का अनावरण एवं स्थापना की गई। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों एवं ग्रामवासियों ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी के जीवन, उनके न्यायप्रिय शासन, समाजसेवा एवं जनकल्याण के कार्यों को स्मरण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम में ग्राम पंचायत निमनी की सरपंच श्रीमती वर्षा भोयर जी सहित धनगर समाज समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य, भाजपा कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में धनगर समाज के लोग एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर वक्ताओं ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी के आदर्शों और उनके समाजहित में किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। उपस्थित लोगों ने उनके विचारों एवं आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक एकता, जनजागरूकता एवं लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया। 🙏

🌾 बीज, उर्वरक और कीटनाशक दुकानों पर कृषि विभाग की सघन जांच

पांढुर्णा | 10 सितंबर 2026

कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देश एवं उप संचालक कृषि श्री मॉरिस नाथ के मार्गदर्शन में कृषि विभाग की टीम ने गुरुवार को पांढुर्णा में बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक विक्रेताओं की दुकानों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय अधिकारी कृषि सुश्री अर्चना डोंगरे एवं विभागीय दल ने दुकानों में उपलब्ध बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों के स्टॉक, स्टॉक की प्राप्ति के स्रोत तथा संबंधित अभिलेखों की जांच की।

अधिकारियों ने दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कृषि सामग्री का नियमानुसार विक्रय एवं स्टॉक का उचित संधारण किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कृषि विभाग की इस कार्रवाई से कृषि आदानों की गुणवत्ता एवं निर्धारित नियमों के पालन को लेकर विक्रेताओं में सतर्कता बढ़ी है।

निरीक्षण दल में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री विनोद लोखंडे, कृषि विकास अधिकारी श्री सुनील गजभिए, डी.आर. तुमदाम, कृषि विस्तार अधिकारी राहुल सरयाम, शिवानी उइके सहित कृषि विभाग का अमला मौजूद रहा।

NCIB NEWS | पांढुर्णा

मंगारली में मोहोड़ परिवार का पारंपरिक कड़ई कार्यक्रम संपन्न सौंसर/पांढुर्णा। ग्राम मंगारली स्थित मोहोड़ परिवार के पैतृक निवास पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पारंपरिक एवं धार्मिक कड़ई कार्यक्रम श्रद्धा और आस्था के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में परिवार के सदस्यों के साथ जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक शामिल हुए। परिवार की वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा के तहत भगवान नागराज एवं नागदेव की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद नागदेव की आरती एवं सामूहिक पूजा का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। परिवारजनों, रिश्तेदारों, ग्रामीणों एवं आगंतुकों ने धार्मिक आयोजन में शामिल होकर पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन किया। मोहोड़ परिवार द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार और समाज को अपनी परंपरा, आस्था एवं संस्कारों से जोड़ने का माध्यम भी बना। आयोजन के अंत में क्षेत्र एवं परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। रिपोर्टर – राजेश चौधरी NCIB NEWS