ई-कॉमर्स कंपनियों पर सरकार की सख्ती, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम; Search Results से लेकर Sponsored Listings तक बदले नियम

नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026: ऑनलाइन खरीदारी करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के हितों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने ई-कॉमर्स क्षेत्र के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026 को अधिसूचित किया है। नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य डिजिटल बाजार में उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना है। साथ ही, ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए कारोबार करने में आसानी और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

शिकायतों के निपटारे में बढ़ेगी जवाबदेही

नए नियमों के तहत प्रत्येक ई-कॉमर्स कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) की कन्वर्जेंस प्रक्रिया का हिस्सा बनना होगा। इससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय उपभोक्ता शिकायत निवारण व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद है।

सरकार के मुताबिक, वर्ष 2025 में NCH को कुल 17,71,622 शिकायतें मिलीं। इनमें 5,11,196 शिकायतें यानी करीब 29 प्रतिशत ई-कॉमर्स क्षेत्र से संबंधित थीं।

इसके अलावा, कंपनी के शिकायत अधिकारी के पास दर्ज की गई शिकायत की एक प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा।

Search Results में नहीं चलेगा खेल

नए नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियां ऐसे तरीके से Search Results को प्रभावित नहीं कर सकेंगी, जिससे उपभोक्ता गुमराह हो या उसके सर्च से संबंधित परिणामों की प्रासंगिकता प्रभावित हो।इसका उद्देश्य ऐसे डिजिटल तरीकों पर रोक लगाना है, जिनसे उपभोक्ता को किसी खास उत्पाद या सेवा की ओर अनुचित तरीके से निर्देशित किया जाता है।

Sponsored Products की पहचान होगी जरूरी

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाले Sponsored Listings को स्पष्ट और प्रमुख तरीके से चिह्नित करना होगा। यानी उपभोक्ता को यह समझने में आसानी होनी चाहिए कि कोई उत्पाद सामान्य सर्च रिजल्ट का हिस्सा है या भुगतान किए गए प्रचार के कारण ऊपर दिखाया जा रहा है।

Discount का दावा तो पुरानी कीमत भी दिखानी होगी

कीमतों में कटौती दिखाने वाले ऑफर्स के लिए भी नए नियम महत्वपूर्ण हैं। जब किसी वस्तु या सेवा पर Price Reduction का दावा किया जाएगा, तो नई कीमत के साथ पिछली कीमत भी प्रदर्शित करनी होगी।

नियमों के अनुसार, ‘Prior Price’ वह सबसे कम कीमत होगी जिस पर संबंधित वस्तु या सेवा को छूट की घोषणा से पहले के 30 दिनों के दौरान पेश किया गया था।

इससे कथित तौर पर बढ़ी हुई पुरानी कीमत दिखाकर बड़ी छूट का भ्रम पैदा करने जैसी प्रथाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

Dark Patterns पर भी सख्ती

ई-कॉमर्स कंपनियों को Dark Patterns की रोकथाम और विनियमन के लिए 2023 में जारी दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।

इसके साथ कंपनियों को हर साल Self-Audit करना होगा और अनुपालन का प्रमाणपत्र प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।

Dark Patterns में ऐसे डिजिटल डिजाइन और तकनीकें शामिल होती हैं, जिनका इस्तेमाल उपभोक्ता के निर्णय को प्रभावित करने या उसे ऐसे विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करने में किया जाता है, जिन्हें वह सामान्य परिस्थितियों में शायद न चुनता।

Product और Seller की जानकारी देना होगा

Marketplace ई-कॉमर्स कंपनियों को उपभोक्ताओं को उत्पाद और विक्रेता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

इसमें Best Before/Use Before Date, Return और Refund की शर्तें, Warranty, Delivery और Payment से जुड़ी जानकारी शामिल है।

इसका उद्देश्य खरीदारी से पहले उपभोक्ताओं को पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अधिक सूचित निर्णय ले सकें।

Consumer Data के इस्तेमाल पर भी नियम

नए प्रावधानों के तहत Marketplace ई-कॉमर्स कंपनियां उपभोक्ता की जानकारी का कुछ निर्धारित उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल स्पष्ट और सकारात्मक सहमति (Express and Affirmative Consent) के बिना नहीं कर सकेंगी।

अलग सेवाओं के नाम पर Bundled Fees पर रोक

Marketplace प्लेटफॉर्म ऐसी सेवाओं के लिए Bundled Fees नहीं वसूल सकेंगे, जो ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से संबंधित नहीं हैं। हालांकि, निर्धारित शर्तों के अधीन Loyalty या Membership Programmes को अपवाद दिया गया है।

Imported Products पर Country of Origin बताना अनिवार्य

आयातित वस्तुओं के मामले में Importer की जानकारी और Country of Origin का खुलासा करना होगा। इससे उपभोक्ता को यह जानने में मदद मिलेगी कि उत्पाद किस देश का है और उसे भारत में किस आयातक के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है।

1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम

सरकार के अनुसार, Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020 पहले से ही ई-कॉमर्स क्षेत्र में उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से सुरक्षा देने के लिए नियामक ढांचा प्रदान करते हैं। 2026 के संशोधन डिजिटल बाजार में बदलते बिजनेस मॉडल और उपभोक्ताओं की बदलती अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।

सरकार का लक्ष्य ई-कॉमर्स क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना है, ताकि डिजिटल बाजार का विस्तार उपभोक्ता हितों की कीमत पर न हो।

नए Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026 देशभर में 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।

सीआरपीसी एनजीओ की शिकायत पर लखनऊ में कथित अवैध सरोगेसी की जांच के आदेश, एनएचआरसी ने लिया संज्ञान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कुछ आईवीएफ केंद्रों के माध्यम से संचालित कथित अवैध सरोगेसी के संबंध में दायर शिकायत पर संज्ञान लिया है, जहाँ आर्थिक रूप से कमजोर एवं संवेदनशील महिलाओं के व्यावसायिक सरोगेसी के लिए कथित रूप से शोषण किए जाने का आरोप है, जो सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के कथित उल्लंघन के अंतर्गत आता है।

यह शिकायत मनीष जैन, जनसंपर्क अधिकारी, सिटिजन राइट्स प्रोटेक्शन काउंसिल (CRPC) – NGO, द्वारा प्रस्तुत की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं असुरक्षित महिलाएं, जिनमें अविवाहित महिलाएं भी शामिल हैं, को धन के बदले व्यावसायिक सरोगेसी के लिए कथित रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

शिकायत में नवजात शिशुओं की कथित अवैध खरीद-फरोख्त को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई तथा कहा गया कि ऐसी गतिविधियाँ महिलाओं की गरिमा, बाल संरक्षण कानूनों तथा मूल मानवाधिकारों के कथित गंभीर उल्लंघन का रूप ले सकती हैं।

Priyank kanoongo

मामले की गंभीरता को देखते हुए, माननीय सदस्य श्री प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी पीठ ने यह टिप्पणी की कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीड़ितों के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन प्रतीत होते हैं, और संरक्षण मानवाधिकार अधिनियम, 1993 की धारा 12 के अंतर्गत संज्ञान लिया गया।

आयोग द्वारा की गई प्रथम कार्रवाई में, शिकायत की प्रति एनएचआरसी के महानिदेशक (जांच) को प्रेषित करने के निर्देश दिए गए, ताकि एक टीम गठित कर मौके पर जांच कराई जाए तथा चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

इसके पश्चात आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक तथा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष को भी नोटिस जारी करते हुए आरोपों की जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्यवाही प्रतिवेदन (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

शिकायत में आईवीएफ एवं फर्टिलिटी केंद्रों की नियमित और सख्त जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित हो, कमजोर महिलाओं के कथित शोषण को रोका जा सके, उनके स्वास्थ्य एवं अधिकारों की रक्षा हो सके, तथा चिकित्सा प्रक्रियाओं की आड़ में बच्चों की किसी भी कथित अवैध खरीद-फरोख्त को रोका जा सके।

मनीष का कहना है,

“गरीबी, भय, आर्थिक निर्भरता और कानूनी अधिकारों की जानकारी के अभाव में इस प्रकार के कथित शोषण के मामले अक्सर दब जाते हैं। जब चिकित्सा व्यवस्था का कथित रूप से अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दुरुपयोग किया जाता है, तब यह केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं रह जाता, बल्कि यह महिलाओं की गरिमा, बच्चों के अधिकार और मानवाधिकारों पर सीधा आघात बन जाता है।”

मनीष का आगे कहना है,

मेरा उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी कमजोर महिला मजबूरी में शोषण का शिकार न बने, कोई भी दंपत्ति अवैध प्रक्रियाओं के जाल में न फँसे, और किसी भी नवजात का जीवन व्यापार का माध्यम न बने। कानून का पालन, पारदर्शिता और जवाबदेही ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।”

एनएचआरसी की जांच शाखा को मौके पर जांच के निर्देश दिए जाने तथा विभिन्न प्राधिकरणों को नोटिस जारी होने के बाद, यह मामला अब आधिकारिक जांच के एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है।

मनीष ने अंत में कहा कि यदि समाज और संस्थाएं समय रहते हस्तक्षेप करें, तो अनेक महिलाओं और बच्चों को ऐसे कथित शोषण से बचाया जा सकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी, दोषियों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त तंत्र विकसित किया जाएगा।