NCIB News | रिपोर्टर: मनीष जैन
नासिक, 15 अक्टूबर 2026: वर्ष 2027 में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले नासिक में भूजल में जहरीले क्रोमियम की अत्यधिक मात्रा मिलने की खबर ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। दक्षिण एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) की 8 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अंबड औद्योगिक क्षेत्र के दत्तानगर में आवासीय बोरवेल के पानी में क्रोमियम का खतरनाक स्तर पाया गया है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि दूषित पानी एक स्थानीय नाले के माध्यम से कुंभ मेले के स्नान घाट के पास गोदावरी नदी में पहुंच रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति में प्रस्तुत आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। SANDRP के अनुसार, एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के दौरान पानी में हेक्सावैलेंट क्रोमियम 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर और कुल क्रोमियम 50.5 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। कुल क्रोमियम की यह मात्रा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित पेयजल की 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर की अधिकतम स्वीकार्य सीमा से लगभग 1,010 गुना अधिक है।


इन निष्कर्षों ने औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण, स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य और आगामी कुंभ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, भूजल में दर्ज क्रोमियम की मात्रा को सीधे गोदावरी नदी के पानी की मात्रा नहीं माना जा सकता। नदी और प्रत्येक स्नान घाट की वास्तविक स्थिति का पता प्रयोगशाला जांच से ही लगाया जा सकता है।
बच्चों के शरीर पर छाले और त्वचा पर गंभीर घाव होने की शिकायत

SANDRP की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दूषित पानी के संपर्क में आने वाले लोगों ने त्वचा पर चकत्ते, छाले और धीरे-धीरे भरने वाले गहरे घाव होने की शिकायत की है। संगठन ने बच्चों के शरीर पर व्यापक त्वचा संबंधी चोटें देखे जाने का उल्लेख किया है। इसके अलावा, कुछ लोगों में लिम्फ नोड्स में सूजन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की भी जानकारी दी गई है।

SANDRP का आरोप है कि नगर निगम की ओर से पानी की अपर्याप्त और अनियमित आपूर्ति के कारण कुछ परिवार नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने के लिए भी बोरवेल के पानी पर निर्भर हैं। संगठन के मुताबिक, कुछ कामकाजी परिवार अपनी मासिक आय का लगभग आधा हिस्सा इलाज, घावों की ड्रेसिंग और वैकल्पिक आवास पर खर्च कर रहे हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में प्रभावित बस्ती की दो महिलाओं के गर्भपात होने की भी जानकारी दी गई है। हालांकि, इन घटनाओं और क्रोमियम के संपर्क के बीच प्रत्यक्ष कारणात्मक संबंध स्थापित नहीं हुआ है। इसके लिए उचित चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।
गोदावरी नदी तक प्रदूषण पहुंचने की आशंका


आगामी कुंभ मेले के संदर्भ में सबसे गंभीर चिंता SANDRP का यह आरोप है कि दूषित पानी एक स्थानीय नाले के जरिए गोदावरी नदी में पहुंच रहा है। संगठन के अनुसार, यह नाला कुंभ मेले के एक स्नान घाट के पास नदी में मिलता है।
SANDRP ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) से नंदिनी नदी/धारा और संदिग्ध प्रदूषण स्थल के नीचे गोदावरी के पानी की तत्काल जांच करने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा है कि प्रदूषण कितनी दूर तक फैला है, इसका पता लगाया जाए और आवश्यकता पड़ने पर नदी के निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों तथा अन्य जल उपयोगकर्ताओं को सतर्क किया जाए।
प्रेस विज्ञप्ति में गोदावरी नदी के पानी में क्रोमियम की वास्तविक मात्रा का कोई प्रयोगशाला परिणाम नहीं दिया गया है। इसलिए यह अभी स्थापित नहीं है कि नदी के किन-किन हिस्सों, स्नान घाटों या तालाबों में प्रदूषण मौजूद है। इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच से होनी आवश्यक है।
औद्योगिक इकाइयों और सरकारी कार्रवाई पर सवाल
SANDRP ने आरोप लगाया है कि पीले रंग के पानी की खबरें सामने आने के बाद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 30 सितंबर 2026 को केवल एक कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। संगठन ने पानी की जांच के नतीजों को सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
संगठन ने अंबड औद्योगिक क्षेत्र में इलेक्ट्रोप्लेटिंग, मेटल फिनिशिंग, पेंट और अन्य संभावित प्रदूषणकारी उद्योगों की व्यापक जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा, सभी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दूषित पानी की आपूर्ति रोकने और पर्यावरणीय सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है।
प्रदूषण का वास्तविक स्रोत, पर्यावरण को हुए नुकसान की सीमा और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई की पर्याप्तता की जांच सक्षम प्राधिकारियों द्वारा की जानी आवश्यक है।
क्या असुरक्षित स्नान व्यवस्था मानवाधिकारों का सवाल बन सकती है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की न्यायिक व्याख्या में स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण संरक्षण शामिल हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना और पर्यावरणीय नुकसान को रोकना भी सरकार की जिम्मेदारियों में आता है।
यदि वैज्ञानिक जांच से यह स्थापित होता है कि कोई निर्धारित स्नान घाट गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है, तो पर्याप्त चेतावनी और सुरक्षा उपायों के बिना लोगों को वहां स्नान करने देना मानवाधिकार और सार्वजनिक कानून से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
हालांकि, केवल भूजल के इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरी गोदावरी नदी या कुंभ मेले के सभी स्नान घाट दूषित हैं। मुख्य सवाल यह है कि क्या सरकार व्यापक जांच कराएगी, परिणाम सार्वजनिक करेगी और जहां गंभीर जोखिम सामने आएगा, वहां समय रहते उचित कार्रवाई करेगी।
क्या लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने से पहले सरकार सभी निर्धारित स्नान घाटों की सुरक्षा प्रमाणित करेगी, या कुंभ मेले के नजदीक आने तक पानी की गुणवत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित रहेंगे?
सुरक्षित स्नान व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करना जरूरी
SANDRP ने संदिग्ध नाले, नंदिनी नदी/धारा और गोदावरी के संबंधित हिस्सों की तत्काल जांच की मांग की है। सभी निर्धारित स्नान घाटों की स्वतंत्र जांच और परिणामों को सार्वजनिक करना वास्तविक जोखिम का आकलन करने के लिए आवश्यक होगा।
यदि किसी स्थान पर पानी असुरक्षित पाया जाता है, तो धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए वहां स्नान पर उचित प्रतिबंध और सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार किया जाना चाहिए।
प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को सुरक्षित पानी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, प्रदूषण के स्रोत की पहचान कर उसे रोकने, गोदावरी की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर जनसुरक्षा सुनिश्चित करने की होनी चाहिए।
2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या प्रशासन समय रहते पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ यह सुनिश्चित कर पाएगा कि श्रद्धालुओं को ऐसे स्वास्थ्य जोखिमों का सामना न करना पड़े, जिन्हें रोका जा सकता है।
