ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की मोहलत

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को बुनियादी मराठी सीखने के लिए एक वर्ष की अतिरिक्त मोहलत दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस अवधि में भाषा संबंधी शर्त पूरी नहीं करने पर चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

यह निर्णय ऑटो रिक्शा और टैक्सी यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल से हुई चर्चा के बाद लिया गया। हाजी अरफात के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मराठी सीखने की इच्छा जताई और अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय मांगा। यूनियनों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि सरकार किसी की आजीविका छीनने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि चालकों को महाराष्ट्र की संस्कृति और मराठी भाषा के प्रति आत्मीयता रखते हुए एक वर्ष में मराठी में प्रभावी संवाद करना सीखना होगा। यह समयसीमा केवल भाषा संबंधी शर्त के लिए बढ़ाई गई है, कानूनी कार्रवाई से छूट के लिए नहीं।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक

इस मामले में पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के समक्ष भी शिकायत पहुंची थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मराठी पढ़ने-लिखने की अनिवार्यता से हजारों चालकों की आजीविका प्रभावित हो सकती है और लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में बेरोजगारी, आर्थिक कठिनाई तथा अधिकारियों की मनमानी की आशंका पैदा हो सकती है।

NHRC की श्री प्रियंक कानूनगो, माननीय सदस्य, की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लेते हुए परिवहन आयुक्त, महाराष्ट्र सरकार को शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर चार सप्ताह में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। सरकार की एक वर्ष की मोहलत से चालकों को भाषा सीखने और आवश्यक शर्त पूरी करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।

“भाषा सीखने का अवसर देना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन किसी भी भाषा संबंधी शर्त को लागू करते समय यह सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी मेहनतकश चालक की आजीविका प्रभावित न हो और उसके साथ कोई मनमानी या भेदभाव न हो।”

मनीष जैन, जनसंपर्क अधिकारी, नागरिक अधिकार सुरक्षा परिषद