राजस्थान में महिलाओं पर मोबाइल पाबंदी का मामला राजस्थान के जालौर जिले के 15 गांवों में महिलाओं द्वारा कैमरे वाले स्मार्टफोन के उपयोग पर लगाए गए प्रतिबंध के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा संज्ञान लिया है।

यह कार्रवाई राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो (NCIB-NGO) द्वारा आयोग को भेजी गई शिकायत के आधार पर की गई है।मामले के अनुसार, जालौर जिले के गाजीपुर गांव में चौधरी समाज की सुंधामाता पट्टी की पंचायत द्वारा यह निर्णय लिया गया कि संबंधित 15 गांवों की महिलाएं कैमरे वाले स्मार्टफोन का उपयोग नहीं करेंगी। पंचायत के आदेश में महिलाओं को केवल की-पैड मोबाइल फोन रखने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही शादी-विवाह, सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने अथवा पड़ोस के घर जाते समय भी मोबाइल फोन साथ रखने पर रोक लगाने की बात कही गई है।
यह पाबंदी 26 जनवरी से लागू किए जाने की घोषणा की गई थी।इस निर्णय को महिला अधिकारों, समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के विरुद्ध मानते हुए राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो (NCIB) के एक अधिकारी ने पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को औपचारिक शिकायत प्रेषित की। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि यह प्रतिबंध केवल महिलाओं पर लागू किया गया है, जो लिंग आधारित भेदभाव की श्रेणी में आता है और संविधान तथा मानवाधिकार सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।

शिकायत पर विचार करते हुए NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के अंतर्गत मामले का संज्ञान लिया। आयोग ने जालौर के जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर निर्देश दिए हैं कि वे पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत करें।
NCIB के अधिकारी का बयान:
“किसी भी पंचायत या सामाजिक संस्था को महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और तकनीक तक पहुंच पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है। यह आदेश न केवल संविधान के विरुद्ध है, बल्कि महिलाओं के मौलिक और मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है। NCIB ऐसे हर मामले में पीड़ितों की आवाज बनकर खड़ा रहेगा।”
मानवाधिकार दृष्टिकोण से टिप्पणी:
“लिंग के आधार पर लगाया गया कोई भी सामाजिक प्रतिबंध मानव गरिमा और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है। ऐसे मामलों में त्वरित प्रशासनिक और कानूनी हस्तक्षेप आवश्यक है।”
आभार
राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो , महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हेतु त्वरित संज्ञान लेने और निष्पक्ष जांच के निर्देश जारी करने के लिए NHRC के माननीय सदस्य श्री प्रियंक कानूनगो का आभार व्यक्त करता है। यह कार्रवाई ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के अधिकारों, स्वतंत्रता और लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
NCIB ने स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में भी महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।

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